इन जीवों का आकार देखकर आप भी कहेंगे — क्या ये सच में असली हैं?
पृथ्वी पर रहने वाले कुछ सबसे विशाल जीव न तो खुले आसमान के नीचे दिखाई देते हैं और न ही अफ्रीका के विशाल मैदानों में। उनमें से कई शायद कभी समुद्र की सतह तक भी नहीं पहुंचते। उनका पूरा जीवन समुद्र के भीतर सैकड़ों मीटर की गहराई में बीतता है, जहां सूरज की रोशनी नहीं पहुंचती और पानी का दबाव बेहद अधिक होता है। वैज्ञानिक इस रहस्यमयी क्षेत्र को गहरे समुद्र के नाम से जानते हैं। यहां रहने वाली कुछ प्रजातियों में एक खास प्रवृत्ति देखने को मिलती है, जिसे डीप-सी जायगैंटिज्म यानी गहरे समुद्र में विशालकाय आकार विकसित होना कहा जाता है। इस प्रक्रिया में गहराई में रहने वाले जीव अपने उथले पानी में रहने वाले करीबी संबंधियों की तुलना में कहीं अधिक बड़े हो जाते हैं। आगे जिन जीवों की चर्चा है, वे ऐसे ही वास्तविक गहरे समुद्री निवासियों में शामिल हैं, जिन्हें पहली बार अपने प्राकृतिक वातावरण में जीवित अवस्था में कैमरे में कैद किया गया। इससे पहले दुनिया उन्हें मुख्य रूप से समुद्र तट पर मिले शवों और पुरानी समुद्री किंवदंतियों के जरिए ही जानती थी। गहरे समुद्र के दिग्गजों की फिल्मिंग गहरे समुद्र में जीवों के विशाल आकार का कोई एक निश्चित कारण अब तक साबित नहीं हुआ है। हालांकि, वैज्ञानिकों के पास कई संभावित स्पष्टीकरण हैं, जो एक-दूसरे से जुड़े हो सकते हैं। अत्यधिक ठंडा पानी जीवों के चयापचय की गति कम कर देता है। इससे उनकी कोशिकाओं और पूरे शरीर को लंबे जीवनकाल में धीरे-धीरे बढ़ने का अधिक समय मिल सकता है। गहराई में भोजन मिलना कठिन और अनिश्चित होता है, इसलिए बड़ा शरीर रखने वाले जीवों को फायदा मिलता है। वे अधिक ऊर्जा जमा कर सकते हैं और लंबे समय तक बिना भोजन के जीवित रह सकते हैं। इसके अलावा, घने अंधेरे और भारी दबाव वाले वातावरण में शिकार करना मुश्किल होता है और सक्रिय शिकारी भी अपेक्षाकृत कम मिलते हैं। ऐसे हालात में छोटे आकार का होना हमेशा सुरक्षा की गारंटी नहीं देता। इस लेख में उन जीवों पर ध्यान दिया गया है जो अपना पूरा जीवन वास्तविक गहरे समुद्र में बिताते हैं। इसमें उन प्रजातियों को शामिल नहीं किया गया है जो भोजन की तलाश में कुछ समय के लिए नीचे उतरती हैं और फिर सांस लेने या अन्य कारणों से सतह के करीब लौट आती हैं। सदियों तक इंसानों को इन विशाल जीवों की मौजूदगी का पता केवल तब चलता था, जब उनका शव समुद्र तट पर बहकर आ जाता या किसी मछुआरे के जाल में कोई अस्पष्ट आकृति फंस जाती। अपने प्राकृतिक वातावरण में उन्हें जीवित अवस्था में रिकॉर्ड करना अपेक्षाकृत नई उपलब्धि है। खास तौर पर पिछले 15 वर्षों में कम रोशनी में काम करने वाले विशेष कैमरों, केबल से नियंत्रित रोबोटों और गहरे समुद्र में उतरने वाली पनडुब्बियों ने इस दिशा में बड़ी भूमिका निभाई है। इनमें से कई महत्वपूर्ण खोजें अमेरिकी समुद्री क्षेत्रों में या अमेरिकी शोध अभियानों के दौरान हुई हैं। राष्ट्रीय महासागरीय और वायुमंडलीय प्रशासन (NOAA) का जहाज Okeanos Explorer, ओशन एक्सप्लोरेशन ट्रस्ट का E/V Nautilus और कैलिफोर्निया स्थित मॉन्टेरी बे एक्वेरियम रिसर्च इंस्टीट्यूट (MBARI) लगातार रोबोटिक उपकरणों की मदद से मेक्सिको की खाड़ी, प्रशांत महासागर के दूरस्थ हिस्सों और समुद्र के सबसे अंधकारमय क्षेत्रों की पड़ताल करते हैं। समुद्रों के बारे में हमारी भौगोलिक समझ में भी बदलाव आया है। 2021 में नेशनल जियोग्राफिक और NOAA ने दक्षिणी महासागर को आधिकारिक रूप से दुनिया का पांचवां महासागर मानचित्रित किया। अमेरिकी भौगोलिक नाम बोर्ड 1999 से ही इस नाम का इस्तेमाल करता आया था। फ्लोरिडा के तट के पास एक विशाल स्क्विड कैमरे में कैद हुआ, जबकि एक अन्य अभियान में रिकॉर्ड किए गए शार्क के वीडियो का असली महत्व कई साल बाद समझ आया। ये वे विशाल समुद्री जीव हैं, जिन्हें वैज्ञानिकों ने उनके प्राकृतिक गहरे समुद्री वातावरण में जीवित फिल्माया है। इनके आकार के पीछे के संभावित कारण और उनकी मौजूदगी साबित करने वाले दुर्लभ दृश्य समुद्र की दुनिया के कई रहस्यों को उजागर करते हैं।
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